झांसी: पिछले कई वर्षों से बुंदेलखंड को पृथक राज्य बनाए जाने की खुलकर वकालत करने वाले कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने 19 जनवरी को भोपाल में यह बयान देकर कि वे न कभी अलग बुंदेलखंड राज्य के समर्थक थे न हैं, सबको चौंका दिया। निश्चित रूप से राहुल के इस बयान से पृथक बुंदेलखंड की मांग कर रहे आन्दोलनकारी आहत हुए हैं। 

पृथक बुंदेलखंड के लिए संघर्षरत बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्‍डेय ने राहुल के इस बयान को अवसरवादिता से प्रेरित बताया है। संजय के अनुसार पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान बुंदेलखंड के झांसी में चुनावी सभा के दौरान इन्हीं राहुल ने चिल्ला-चिल्ला कर पृथक बुंदेलखंड राज्य के लिए हुंकार भरी थी। इससे पूर्व जनवरी 2008 में भी बुंदेलखंड दौरे पर आए राहुल ने झांसी की आम सभा में बुंदेलखंड राज्य की मांग करते हुए मायावती से रोड़े न अटकाने की अपील की थी। इसके अलावा, वे समय-समय पर अलग बुंदेलखंड के मुद्दे के साथ खड़े नजर आए, जो सारा देश जानता है।

लेकिन, हाल ही में भोपाल में उन्होंने अचानक ‘यू’ टर्न लेते हुए पृथक बुंदेलखंड का समर्थन न करने की अनपेक्षित बात कही। पाण्डेय ने कहा कि राहुल गांधी के इस विरोधाभासी बयान के पीछे कारण कुछ भी हो, किन्तु राहुल में आए अचानक इस परिवर्तन ने यह सिद्ध कर दिया कि वे भारतीय राजनीति के उन अवसरवादी नेताओं की जमात से अलग नहीं हैं, जो राजनीतिक नफा-नुकसान सोच कर अपने बयान बदल लेते हैं। लिहाजा, इस कदम से उनकी जो छवि अभी तक बुंदेलखंड के लोगो में बन चुकी थी, कहीं न कहीं वह धूमिल जरूर हुई है।

Rahul Gandhi seems to have done an about face on the issue of a separate Bundelkhand state. The people of this area clearly remember being promised statehood during the last Lok Sabha election campaign. Rahul now says he does not support the demand.
RAHUL GANDHI’S statement at a press conference in which he said,” I don’t support at all the issue of a separate Bundelkhand state.”, has shocked the people of the region, who were counting on the support of the Gandhi scion to push for their demand of a separate state.
The Congress General Secretary’s stand on statehood for Bundelkhand was understood to be pro until this statement. In fact the people of Bundelkhand voted Congress candidates into power upon Rahul’s open declaration of support to the issue of a separate statehood for Bundelkhand during the last Lok Sabha election campaign.
The disappointment of the people found expression in Sanjay Pandey’s voice. The chief convener of the Bundelkhand Akikrit Party said, “The real face of Rahul Gandhi has been exposed now. He only flirted with us on the Bundelkhand issue. During the election campaign of the 15th Lok Sabha election in Jhansi he was shouting for a separate Bundelkhand state, but then the innocent Bundelkhandees did not know the reality of this congress man and hence they supported his party candidate Pradeep Jain. But Rahul has only played with our emotions.”
sanjay pandey

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झाँसी । बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय ने यहाँ एक कार्यक्रम में कहा कि आज बुन्देलखण्ड के किसानो को सीधी और त्वरित सहायता की जरूरत है। सूखा राहत के नाम पर विभिन्न योजनाओ में जमकर बन्दर बाँट होता है , इसलिए पात्र किसानों को समय से और उचित मात्रा में राहत राशिः नही पहुँच पाती है। केन्द्र सरकार से मांग करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को पैकेज न देकर जिलाधिकारियों के माध्यम से किसानों को सीधी सहायता मुहैया करायी जाए। ये पहले ही सिद्ध हो चुका है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने ऐसी राहत राशियों का जमकर दुरूपयोग किया है।लिहाजा अब पुनरावृत्ति से बचा जाना चाहिए। दूसरी ओर पाण्डेय ने यह भी कहा कि सूखा राहत मिलने के नियम कानून इतने जटिल होते है कि आम आदमी उन्हें समझ नही पाता है , इसलिए ऐसे में वह जान ही नही पाता है कि उसे कितनी राशि मिलनी चाहिए , फलस्वरूप उसे जो भी मिलता है वह उतने से ही संतुष्टि कर लेता है। अतः राहत देने का फार्मूला आसान हो । कहा कि बुन्देलखंड में सूखा पीड़ित किसानो द्वारा आत्म हत्याओं का सिलसिला शुरू हो चुका है इसलिए और मौतों का इंतजार न करते हुए सरकार को जल्द ही सहायता की सोचनी चाहिए। श्री पाण्डेय ने कहा कि वैसे तो इस वर्ष पूरे भारत में ही सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है किंतु बुन्देलखंड कि स्तिथि इसलिए हटकर है क्योंकि यहाँ सूखा का पहला साल नही बल्कि पिछले पॉँच वर्षों से यही हालत है। इसलिए सरकार को बुन्देलखंड के किसानो के बारे में प्राथमिकता से सोचना होगा। राहत प्रदान करते समय भी बुन्देलखंड के किसानो को देश के अन्य हिस्सों के किसानो से तुलना न करते हुए विशेष अधिभार दिया जाए। बताया कि बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी यहाँ के किसानों की समस्याओं को लेकर विशाल आन्दोलन शुरू करने जा रही है

bk12एक बार फ़िर से बुन्देलखंड में सूखे जैसी नौबत की संभावना बन रही है। भीषण गर्मी में आमजन, पशु सब अकुला रहे है। गर्मी के तल्ख तेवर कम होने का नाम ही नहीं ले रहे। मानसून के आने के बाद भी वर्षा न होने से किसानों के माथे में चिंता की लकीरें पड़ गई है। सभी यह सोच कर दहल जाते है कि क्या इस वर्ष भी पिछले वर्षो की भांति सूखे की भयावह स्थिति से रूबरू होना पड़ेगा। किसान अब बरखा रानी का बेसब्री से इंतजार कर रहे है।
गर्मी इस वर्ष अपने पूरे शबाब पर है। जिससे धरती से जल स्तर खिसकने लगा है। लगातार चार साल से बुंदेलखंड के किसानों को सूखे की मार झेलने के बाद पिछले वर्ष हुई बारिश ने कुछ राहत तो जरूर पहुंचाई थी। मगर इस वर्ष मानसून आने के बाद भी बारिश न होने से किसानों को फिर वहीं पुराने दिन याद आने लगे है। रूठे इंद्रदेव को मनाने के लिये ग्रामीण अंचलों में धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो गये है। महोबा जिले के कुलपहाड़ के मां बाघ विराजन मंदिर में पिछले एक सप्ताह से संकीर्तन और पूजा पाठ का दौर चल रहा है। किसान को भी फसल बुवाई के लिये बरखा रानी का इंतजार है। पहले 15 जून से ही आसमान से बारिश होने लगती है। जिससे किसान अपने खेतों में खरीफ फसल की बुवाई करने लगता था। लेकिन इस वर्ष अब तक बारिश न होने से किसानों में चिंता की लकीरें स्पष्ट देखी जा सकती है। सभी मायूस हो बस इंद्रदेव की मेहरबानी का इंतजार कर रहे है। लेकिन वह यह सोचकर दहल जाते है कि क्या इस वर्ष भी पिछले चार वर्षो की भांति सूखे की भयावह स्थिति से रूबरू होना पड़ेगा। सभी किसान अब बरखा रानी का बेसब्री से इंतजार कर रहे है।
बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय कहते है कि बुंदेलखंड मे उद्योगों का अभाव होने के कारण यहाँ का निवासी पूरी तरह खेती पर निर्भर है इसलिए वह मौ़सम में थोडी सी अनियमितता से ही घबरा जाता है. वे कहते है कि हमारी पार्टी इसीलिए सदैव सरकारों से मांग करती आ रही है कि बुंदेलखंड मे औद्योगिक विकास की दरकार है ताकि यहाँ का किसान कृषि का विकल्प तो पा सके.

यू तो सरकार ने राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना ( नरेगा ) के तहत लोगो को १०० दिन के रोजगार का बदोबस्त किया है पर बुन्देलखंड में यह योजना सफल नही हो पा रही है इसलिए हजारो ग्रामीणों का पलायन प्रतिदिन जारी है। बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी के संयोजक संजय पाण्डेय का मानना है कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के संचालन में प्रदेश सरकार और उसके कर्मचारी ही सबसे बड़ा रोड़ा बने हुये है।राज्य कर्मचारी फर्जी जॉब कार्ड बना योजना के पैसे का बंदरबांट कर रहे हैं। परन्तु फर्जी रिपोर्ट बना बना कर योजना की सफलता की बात की जा रही हैं।
महोबा जिले के विकासखंड कबरई का गांव पचपहरा ,मुख्यालय से पांच किमी दूर इस गांव में नरेगा का हाल बेहाल है। पिछले वित्तीय वर्ष में काम करने के बाद मजदूरी न मिलने से ग्रामीण पलायन करने को मजबूर हैं। ग्राम प्रधान भी गांव की दशा के लिए ग्राम विकास अधिकारी को जिम्मेदार मानते हैं। ग्राम प्रधान अवधरानी राजपूत बताती है कि पिछले वित्तीय वर्ष में खेत तालाब में मजदूरी करने वाले दर्जनों मजदूरों का आज तक भुगतान नहीं मिल पाया। वह कहती हैं कि ग्राम विकास अधिकारी दयाराम निर्मल महीनों से गांव में नहीं आये। पंचायत भवन पिछले 8 माह से अधूरा पड़ा हुआ है। गांव के राजू कुशवाहा ने बताया कि पिछले वर्ष की मजदूरी में एक हजार रुपया अभी तक नहीं मिला। गांव के ही कालीप्रसाद अनुरागी व ममता यादव ने भी पिछले कार्य की मजदूरी न मिलने का दुखड़ा रोया। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान व ग्राम विकास अधिकारी द्वारा फर्जी जॉब कार्ड बना योजना के पैसे का बंदरबांट किया जा रहा है। प्रधान अवधरानी का आरोप है कि ग्राम विकास अधिकारी कोरी चेक में हस्ताक्षर बनाने का दबाव बना रहे थे। मना करने पर पंचायत में आया 9 लाख रुपया विकास कार्यो की राह देख रहा है। वह कहती है कि ग्रामीण पंचायत सचिव को ही नहीं जानते। महीनों से गांव में खुली बैठक का आयोजन नहीं किया गया। वह कहती है कि कई बार उच्चाधिकारियों से पंचायत अधिकारी को हटवाने की मांग कर चुकी है। मगर अधिकारियों से सांठगांठ होने के कारण आज तक कार्रवाई नहीं की गई। वह कहती है कि सचिव की मनमानी का विरोध करने पर अपनी पहुंच शासन स्तर पर बता धमकी देते है। जिसका सबूत पिछले वित्तीय वर्ष में आया 9 लाख रुपया अभी खर्च होना है। गांव के प्रमोद राजपूत व रामकुमार ने बताया कि मजदूरी का पिछला पैसा ही नहीं मिला तो आगे मजदूरी करने से क्या फायदा।ग्राम विकास अधिकारी दयाराम निर्मल कहते है कि सभी जरूरत मंदों को जॉब कार्ड दिलाया जा रहा है। ग्राम प्रधान अपने हिसाब से काम कराने के लिये अनावश्यक दबाव बना रहे हैं। यही हाल बुन्देलखंड के हर गाँव का है । संजय पाण्डेय ने कहा कि बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी नरेगा में हो रही धांधली को प्रमुख मुद्दा बनाकर बंदरबांट का खुला विरोध करते हुए जनांदोलन छेड़ेगी। कहा कि पार्टी मांग करेगी की बुंदेलखंड में १०० दिन का रोजगार नहीं बल्कि पूरे वर्ष के रोजगार की गारंटी हो.

जैसे जैसे मानसून में देरी हो रही है वैसे वैसे बुन्देलखंड के लोगो और जानवरों की जिजीविषा दम तोड़ रही है। असल में पिछले कई वर्षो के सूखे का सामना कर चुके बुन्देलखंड वासी पुनरावृत्ति नही चाहते है ,किंतु धीरे धीरे हालात वैसे ही बनते जा रहे है। भीषण गर्मी में पेयजल संकट दिनोंदिन गहराता जा रहा है। बुन्देलखंड के सभी जिलों में लोगों का पेयजल के लिये संघर्ष जारी है। सुबह से ही हैण्डपंपों पर पानी भरने वालों की लंबी लाइन लग जाती है और यह सिलसिला देर रात तक अनवरत जारी रहता है। बड़ों की छोड़े बच्चे भी पानी की जुगाड़ के लिये परेशान रहते है। प्रचंड गर्मी में जानवरों को भी अपना गला तर करने के लिये खासी मशक्कत करना पड़ रही है।उमस भरी गर्मी में पेयजल संकट विकराल होता जा रहा है। जलस्तर नीचे खिसकने से कुएं व हैण्डपंप भी धीरे-धीरे साथ छोड़ रहे है। जहां हैण्डपंप सही है वहां पानी भरने वालों की लंबी लाइन लगती है। जो एक बार पानी भर लेता है उसका नंबर फिर घंटों बाद ही आ पाता ।सर्वाधिक परेशानी चित्रकूट के पाठा क्षेत्र, महोबा और जालौन में है।कई जगह ऊंचाई वाले इलाके होने के कारण जल संस्थान की आपूर्ति भी नहीं पहुंच पाती। जिससे यहां के वाशिंदे पूरी तरह हैण्डपंपों पर आश्रित है। हैण्डपंपों में पानी भरने वालों की काफी भीड़ जमा होती है। सुबह 4 बजे से ही लोग हैण्डपंप से पानी भरने लगते है और यह सिलसिला देर रात तक जारी रहता है। जहाँ जल संस्थान द्वारा टैंकरों से जलापूर्ति दी जा रही वहां कुछ प्रभावशाली लोग उसमें अपना कब्जा जमा लेते है। आम लोगों का नंबर आते-आते टैंकर खाली हो जाता है। जिससे पेयजल के लिये खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। कमोवेश यही हाल समूचे बुन्देलखंड का है। आमजन की तो छोड़े जानवरों को भी गला तर करने को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। उनके लिये चरही तो बनाई गई मगर उनमें पानी नहीं भरा गया। बेचारे बेजबान जानवर अपनी प्यास बुझाने को दर-दर भटकते रहते है। बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के संजय पाण्डेय प्रदेश सरकार पर आरोप मढ़ते हुए कहते है कि एक बार लम्बा सूखा झेल चुके बुंदेलखंड क्षेत्र में सूखे से निपटने के लिए इस साल भी सरकार ने पूर्व तयारी नहीं की है.

In demand of separate Bundelkhand state,Bundelkhand Akikrit Party activists will demonstrate in front of parliament in Delhi during coming budget-session.Thousands of party members will demand to bring a bill in parliament to start a costitutional method to create the state. After one day demonstration and “DHARNA” a memmorendom of the subject will be submitted in Prime Minister Office requesting Dr. Manmohan Singh to take kind attention in the respect.

बुन्देलखंड राज्य निर्माण के प्रति दोहरा नजरिया रखने वाले दलों को महंगा साबित होगा।जहां बसपा प्रमुख पृथक बुंदेलखंड राज्य की वकालत करती है वही वे इस आशय का प्रस्ताव केंद्र को भेजने से कतराती है . इसका मतलब उनकी सोच में कोई खोट है. इसी तरह कांग्रेस भी बुन्देलखंड की बात करती हैं पर दूसरा राज्य पुनर्गठन आयोग बनाने की हिम्मत नहीं जुटा पाती.
वर्षो से हो रही कवायद के फलस्वरूप राज्य निर्माण का कार्य सिफर बना हुआ है। कभी केन्द्र सरकार प्रात निर्माण की गेंद राज्य सरकार के पाले में डाल देती है तो कभी राज्य सरकार इसे किक कर पुन: केन्द्र सरकार के पाले में पहुंचा देती है। ये राजनैतिक दल बुंदेलखण्ड में फैले भ्रष्टाचार, अकाल की स्थिति पर आसू तो बहाते है, लेकिन इन समस्याओं को जड़ से मिटाने के लिए प्रात का निर्माण करने में पीछे हट जाते है। यही बड़ी वजह है कि बुन्देलखण्ड बड़ी कीमत चुकाने के पश्चात भी प्रात के रूप में पहचान हासिल नहीं कर पा रहा है।बुन्देलखण्ड का मसौदा वर्ष 1955 में ही तय कर लिया गया था, लेकिन तत्समय इसको अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका, जिसका खामियाजा आज तक बुन्देलखंडियों को भुगतना पड़ रहा है। कई संगठन प्रात निर्माण के मुद्दे को जीवित बनाये हुए है। प्रात निर्माण के लिए बुन्देलखण्ड एकीकृत पार्टी ने उग्र आदोलनों की शुरुआत की है ,इन आदोलनों के पश्चात तेजी से सरकारों का ध्यान बुन्देलखण्ड की बदहाली पर गया . वर्तमान समय में बुन्देलखण्ड में अनेक कार्यक्रम प्रात निर्माण की लड़ाई के लिए चलाये जा रहे है। रैलियों, आदोलनों के फलस्वरूप भी प्रात अब भी देश के नक्शे पर उभर नहीं पाया है। बुन्देलखण्ड में इतना राजस्व प्राप्त होता है जो एक प्रात के लिए जरूरी है। इसके बावजूद भी सरकारे इसे प्रात का नाम देने में सकुचा रही है। बुद्धिजीवी लोगों का मानना है कि सरकारों द्वारा बुन्देलखण्ड को प्रात नहीं बनाने के पीछे बड़े राजनैतिक दल ही है . सपा जैसे भी कई दल है जो अलग प्रात बनाने पर सीधे तौर पर न कर चुके है। उन्हे लग रहा है यदि बुन्देलखण्ड राज्य बन गया तो उनका बड़ा वोट बैंक खिसक जायेगा। बुद्धिजीवी मानते है कि भले ही बुन्देलखण्ड में अशिक्षितों की बड़ी तादाद हो लेकिन समय आने पर इस क्षेत्र के लोग ऐसे राजनैतिक दलों को सबक सिखा देंगे।आगामी लोकसभा चुनाव में यहाँ की जनता इनसे खुलकर बदला लेने के मूड में है

बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक संजय पाण्डेय ने कहा कि पार्टी का लक्ष्य है कि लोक सभा चुनाव से पूर्व पूरे बुंदेलखंड मे सदस्य संख्या कम से कम एक लाख हो जाये। हालाँकि देखने मे यह अत्यंत कठिन काम प्रतीत होता है, परन्तु पार्टी संगठन के पदाधिकारी इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दिन रात लगे हुए हैं। बांदा मे सुरेन्द्र तिवारी, झाँसी मे कुवर बहादुर आदिम, छतरपुर मे राजा प्रजापति, चित्रकूट मे लवलीन द्विवेदी ने इस अभियान की शुरुआत कर दी है। पार्टी के प्रांतीय महासचिव सुरेन्द्र तिवारी ने बताया कि हम गाँव गाँव मे चौपाल लगाकर लोगो को सदस्यता गृहण करवा रहे हैं। पार्टी की साधारण सदस्यता शुल्क पॉँच रुपया तथा सक्रिय सदस्यता शुल्क दस रुपया रखी गयी है।

बांदा। बुन्देलखंड एकीकृत पार्टी पृथक बुन्देलखंड राज्य का मुद्दा लेकर चुनाव लड़ने की तयारी में जुट चुकी है। चुनाव से पूर्व बुंदेलखंड क्षेत्र के हर मतदाता तक पृथक प्रान्त के औचित्य को पहुचाने के लिए पार्टी ने विभिन्न कार्यक्रम आरम्भ किए हैं। ब्लाक (प्रखंड) स्तर पर टोलियाँ गठित की जा रही हैं जो सम्बंधित प्रखंड के अन्दर आने वाले सभी गावों में बारी-बारी से पहुंचकर वहां संकल्प सभाएं आयोजित करके लोगो को शपथ गृहण करवाई जायेगी तथा पृथक राज्य आन्दोलन में सर्वस्व समर्पण के संकल्प को दोहराया जाएगा। उक्त जानकारी पार्टी संयोजक संजय पाण्डेय ने यहाँ एक प्रेसवार्ता में दी। पाण्डेय ने पत्रकारों को जानकारी देते हुए बताया कि फरबरी में बांदा में “कारण बताओ रैली ” का आयोजन किया जाएगा जिसमे बुंदेलखंड के विभिन्न जिलों से आए हजारों आन्दोलनकारी केन्द्र और राज्य सरकारों को घेरते हुए सबाल पूछेंगे कि आख़िर बुन्देलखंड राज्य मसले पर सार्थक कार्यवाही क्यों नही? कारण पूछा जाएगा कि जब मायावती बुन्देलखंड राज्य की पक्षधर है तो वे केन्द्र को प्रस्ताव क्यों नही भेजती? कारण पूछा जाएगा कि जब मनमोहन सिंह समेत पूरी कांग्रेस और यूपीए सरकार बुंदेलखंड राज्य की वकालत करते हैं तो राज्य पुनर्गठन आयोग क्यों नही बनता? कारण पूछा जाएगा कि कांग्रेस और बसपा के सांसद संसद में इस मुद्दे को क्यों नही उठाते?कांग्रेस और बसपा के नेताओं से पूछा जाएगा कि वे बुंदेलखंड राज्य मामले पर फर्जी बयानबाजी कर पॉँच करोड़ बुन्देलखंडी लोगो का भावनात्मक शोषण करने से बाज क्यों नही आते? कारण पूछा जाएगा कि कांग्रेस और बसपा इस मुद्दे के पक्ष में है तो वे बुंदेलखंड राज्य का मुद्दा अपने चुनावी घोषणापत्र में शामिल क्यों नही करती?कुल मिलाकर बुंदेलखंड एकीकृत पार्टी फर्जी शिगूफे छोड़ने वालों को बेनकाब करेगी। बांदा के बाद झाँसी और खजुराहो में भी ऐसी रैलियां होगी.